उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले के एक छोटे से गांव में अमित नाम का एक लड़का रहता था। उसकी उम्र लगभग 18 साल थी, और वह 12वीं कक्षा का छात्र था। अमित के बड़े भाई राकेश की शादी हाल ही में सीमा नाम की लड़की से हुई थी। सीमा बहुत ही खूबसूरत और समझदार थी। राकेश शादी के कुछ समय बाद ही पैसे कमाने के लिए दिल्ली चला गया।
राकेश के जाने के बाद, सीमा अकेलेपन से जूझ रही थी। वह अपने पति को याद करती थी, लेकिन नौकरी की मजबूरी के कारण राकेश लंबे समय तक घर नहीं आ सकता था। सीमा को घर में अमित का सहारा था। अमित भोला-भाला और सीधा लड़का था, जो अपने भाई के कहे अनुसार हर काम करता था। दिन सीमा के मायके से फोन आया कि उसकी मां बीमार है। सीमा ने अमित से कहा, "देवर जी, मुझे मायके जाना है। क्या तुम मुझे छोड़ सकते हो?" अमित ने तुरंत हामी भर दी। उसने अपनी बाइक निकाली और सीमा को लेकर उसके मायके जाने लगा। रास्ते में एक घना और सुनसान जंगल पड़ा। सीमा ने अचानक कहा, "देवर जी, यहां बाइक रोक लो। मुझे थोड़ा काम है।"
अमित थोड़ा हैरान हुआ लेकिन उसने कुछ नहीं कहा और बाइक रोक दी। सीमा उसे झाड़ियों की ओर चलने को कहने लगी। अमित ने पूछा, "भाभी, यहां झाड़ियों में ऐसा क्या काम है?" सीमा ने कहा, "बस तुम मेरे साथ आओ।"
झाड़ियों के बीच पहुंचने पर सीमा ने अमित से कहा, "देवर जी, मुझे तुम्हारे साथ कुछ समय बिताना है।" भोला-भाला अमित समझ नहीं पाया। सीमा ने उसे जमीन पर बैठाया और उसका हाथ पकड़कर अपनी ओर खींच लिया। अमित को धीरे-धीरे समझ में आने लगा कि सीमा क्या चाहती है।
सीमा ने धीरे-धीरे अमित को अपनी ओर आकर्षित किया। वह दोनों इतने करीब आ गए कि उन्होंने संबंध बना लिया। इस घटना के बाद दोनों के बीच अजीब सा रिश्ता बन गया।
इसके बाद, जब भी मौका मिलता, सीमा और अमित एक-दूसरे के करीब आने लगे। सीमा ने अपने पति राकेश को पूरी तरह भुला दिया और अब अमित के साथ अपना समय बिताने लगी। अमित को भी इस सब में आनंद मिलने लगा।
नौ महीने बाद सीमा ने एक बच्चे को जन्म दिया। राकेश दिल्ली से घर वापस आया और इस खुशी में झूम उठा। उसे इस बात का बिल्कुल भी शक नहीं हुआ कि बच्चा उसका नहीं है। वह इसे अपना ही मानकर पालने लगा।
धीरे-धीरे गांव के लोग सीमा और अमित के रिश्ते को लेकर बातें करने लगे। कुछ लोगों ने यह बात राकेश तक पहुंचाई। एक दिन राकेश ने सीमा से इस बारे में पूछा। सीमा ने इसे झूठ बताया और राकेश ने भी यह सोचकर इसे अनदेखा कर दिया कि शायद लोग यूं ही बातें बना रहे हैं।
अमित और सीमा के बीच का यह रिश्ता कुछ समय और चला। लेकिन एक दिन अमित के मन में अपराधबोध जागा। उसने महसूस किया कि वह गलत कर रहा है और अपने भाई के साथ धोखा कर रहा है। अमित ने सीमा से मिलना बंद कर दिया और अपने गांव से दूर चला गया।
सीमा इस बात से परेशान हो गई। उसने अमित से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन अमित वापस नहीं लौटा। सीमा अब अकेली रह गई थी। वह अपने पति के साथ तो रह रही थी, लेकिन उसे हमेशा इस बात का डर सताता था कि अगर सच सामने आ गया तो उसका घर टूट जाएगा।
"यह कहानी हमें सिखाती है कि गलतियां जिंदगी को बर्बाद कर सकती हैं। रिश्तों की मर्यादा को बनाए रखना बेहद जरूरी है।
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